Friday, August 13, 2010

हसरत

ना राहे ना मंजीले मिली
मिली तो बस सजा मिली

राहों में फूल मिले ना मिले,
काटों की तड़प मुनासिब मिली

डगमगाते है कदम,
आखिर क़दमों में इतनी हरकत क्यूँ है?

सोच सोचकर सूज गया है दीमाग
राहत मिले ना मिले
आँखें निकल आई है बाहर
आखिर इनायत कब होगी

आँखों में अश्क मिले ना मिले
नमी तो होगी
फिर आएगी चमक इन आँखों में
कभी तो खुदा की करामात  होगी

सुकून मिले ना मिले
ये इल्म है हमें
हर तरफ मेरे नाम की बारिश होगी

अक्स में दम है अगर
मुश्किल कितनी भी हो डगर
एक दिन मेरी ये हसरत पूरी तो होगी

5 comments:

  1. अक्स में दम है अगर
    मुश्किल कितनी भी हो डगर
    एक दिन मेरी ये हसरत पूरी तो होगी
    nice poem :)

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  2. bahut khoob!
    wah!
    tumhari har hasrat poori hogi!

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  3. thanks magiceye for beautiful comment.

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  4. Khusboo to bahut hai Kavita main
    magar phoolo ke tarah dukho ke kantay bhi hai

    Na kar itna gum tu zalim
    hasrat to teri hogi zaroor puri
    Magar kahi aisa na hoon
    ki khushi se ansoo chalak jaye
    Aur lab muskra uthay

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