तो आज मेरे लिए बचपन खरीद कर ले आओ
ज्यादा महंगा नहीं होगा ,वोह तो तुम्हे किसी गली में कही हँसता ,रोता मिल जायेगा
बचपन एक जादुई खिलौना है जो कभी तो ठाहके लगा रहा है,
कभी जिद कर रहा है,कभी बिलख रहा है तो किसी से लड़ रहा है.
मेरे लिए तो सिर्फ वो बचपन ले आओ
और जो भी मेरे पास है वो ले जाओ
तुम देखना बचपन कही किसी कोने में कटोरा लिए भीख मांग रहा होगा
हँसता,तुतलाता,नाचता,झूलता,रोता,बिलखता,पगला सा,जिद व किलकारियों से भरा बचपन
आज मुझे लौटा दो,
वो प्यारा सा,जादू सा बचपन
Bahot achha ! Bahot achha! हँसता,तुतलाता,नाचता,झूलता,रोता,बिलखता,पगला सा,जिद व किलकारियों से भरा बचपन
ReplyDeleteआज मुझे लौटा दो,
kitana sahi likhaa hai Aapane !
PDkulkarni63+
NY-USA
27-7-2010
thanks.
ReplyDeletenice poem and banner pic too
ReplyDeletethanks .
ReplyDelete"wo kagaz ki kashti wo baarish ka paani" used to be my favourite gazal before i read this one......m proud of u didi
ReplyDelete"तुम देखना बचपन कही किसी कोने में कटोरा लिए भीख मांग रहा होगा"
ReplyDeletemade me cry
OH SO SWEET OF YOU.I WROTE THIS POEM WHEN I WAS IN 10TH CLASS ANS SAW A VERY POOR KID BEGGING SO BADLY ON TRAFFIC SIGNAL.I WAS IN THE SCHOOL BUS AND FELT THAT PAIN AND THREW THOSE EMOTIONS ON A PIECE OF PAPER.
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